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बुधवार, 24 मार्च 2010

देह से कब मुक्त होगी रूह...........

रविवार का दिन था। सुबह अखबार पढ़ते हुए अनायास ही मेरी नज़र वैवाहिक विज्ञापन वाले पन्ने पर पद गई। ऐसे ही एक विज्ञापन मे एक वधु की तलाश की गई थी। विज्ञापन मे अपने स्नातक बेटे के लिए एक सुशील, संस्कारी और गोरे रंग की मांग की गई थी। साथ ही लड़की का शिक्षित होना भी अनिवार्य था। इस विज्ञापन के ठीक नीचे के विज्ञापन पर भी मेरी नज़र गई जहाँ लड़का थोडा अधिक पढ़ा लिखा था तो ज़ाहिर तौर पर लड़की के लिए गुणों का दायरा भी अधिक बड़ा था। लड़की इंग्लिश मीडियम की पढ़ी होनी चाहिए थी लेकिन गोरी चमड़ी की चाह यहाँ भी बरक़रार थी।
इन् विज्ञापनों को देखकर मन सोचने को विवश हो गया की क्या एक सांवले रंग की लड़की चाहे कितनी भी शिक्षित हो उसके रंग के कारण वो योग्य लड़के के लिए अपात्र है? फिर मुझे लगा की ये विज्ञापन एक वर्ग विशेष की मानसिकता को दिखा रहे हैं। सो मैंने तभी एक इंग्लिश न्यूज़ पेपर के मेत्रिमोनिअल पन्ने खंगालने शुरू किये। मेरा भ्रम था की इस अखबार को पढने वाले सभ्य और अधिक व्यावहारिक होते हैं क्यूंकि जब कोई खुद को समाज मे आधुनिक होने का दिखावा करना चाहता है तो उसके यहाँ इंग्लिश अखबार दिख जाता है। लेकिन जब विज्ञापनों को देखा तो लगा की औरत सिर्फ एक देह मे कैद रूह है।

यहाँ जो मांग की जा रही थी वो पहले से भी ज्यादा ही थी। लड़की के सुशिल, संस्कारी और सुन्दर होने जैसे गुणों ने उसका पीछा नहीं छोड़ा था बल्कि उसके साथ जुड़ गए थे आधुनिक विचारधारा, कॉन्वेंट एजुकतेद और कामकाजी होने विशेषण, यानि अब उसके कंधो पर दोहरी जिम्मेदारी थी। लेकिन आकर्षक देह और गोरी चमड़ी उसका पीछा नहीं छोड़ रही थी।
ये विज्ञापन मेरे लिए उस समाज की एक तस्वीर थे जिनके लिए औरत की देह ही सबकुछ है। उस देह मे कैद औरत की रूह किसी को नज़र नहीं आती । सवाल है की आज के दौर मे भी जब औरत आदमी के कंधे से कन्धा मिलकर चल रही है वहां भी उसकी बोद्धिक क्षमता पर देह हावी क्यूँ हो जाती है?
क्या कभी वो सुबह आएगी जब औरत को उसकी सूरत के लिए नहीं उसकी सीरत के लिए सम्मान मिलेगा ?
aaj की हर वो शिक्षित लड़की समाज से यही सवाल करती है की औरत की रूह देह से आज़ाद कब होगी? फर्क सिर्फ इतना है की मेरे जैसी औरत ये प्रश्न उस समाज के आगे उठा सकती हैं लेकिन एक बड़ा वर्ग केवल अकेले में रोकर अपने दर्द को कम करने की कोशिश ही कर सकता है....पर .......सवाल यही है की देह से कब मुक्त होगी रूह??????



प्रतीक्षा

8 टिप्‍पणियां:

  1. lekhika ki kalam mai jevantta hai,asie vichar kebal krantikari chand mahilao ke hi mil sekte hai.Bhahut prabhav shali lekhni hai jo her verg ko sochney per vibash karne ki chamta rakhti hai.Asha hai aage bhi aisa aur parney ko milega.

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  2. lekh to acha hai, magar iska templete change karo

    or haan visit my blogs pawankumarpks.blogspot.com and pawankumar83.blogspot.com

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  3. आपने प्रश्न बहुत ही अच्छा उठाया है .......यह हमारे समाज की विडम्बना ही तो है .........लड़का चाहे देखने में कैसा भी हो उसे गोरी सुन्दर लड़की ही चाहिए.... अपनी अर्धांगनी के रूप में .
    कहने को सब कहते हैं .....हम नए विचारधारा के हैं पर सच मानिये तो हमारा समाज अब भी कुंठा से ग्रसित है . अब जरूरत है लड़कियों को आगे आने की और आपने लिए हाड मांस के
    जीवन साथी नहीं...... सही मायने में कंधे से कन्धा मिलाकर चलने वाले और सीरत को समझने वाले जीवन साथी को चुनने की .

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  4. First of all sorry because i don't know how to type in Hindi, I always prefer hindi but cant help it.
    Now I must say that you have picked a pretty good topic but from a different angle. I have a different perspective on it. I think that we Indians are the most racial community on this earth. Everyone has developed a sickness about the colour of skin. You see the big market of fairness creams in India. I can tell you, you give and adv for a beauty product and say that you will get fair in 21 days and then see the girls from every age group getting mad to try it. This is not about that only a man wants a physically attractive woman as his life partner, it is true vice versa also. I mean that is something which you can't help. Even the girl would also want to have his guy looking like Salman Khan. But accepted that in matrimony ads, boy's side is more vocal in putting it.
    But its the complete society which is going crazy about being white, no one can help it. So, i think that you got my point that there is one more angle to it (other than Man vs Woman).

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  5. esh chote se ghatna ( purush hu ishliey chote he kahuga ) ko jish question ke saat hamara samaj ko darpen ke samane khada karne ka jho peryash kiya gaya hai who sarhanea hai.
    mai bhe eshi samaj ka hessha hu islieay aurat ke dard ko mahsushe karte huai ushke question ka ans nahi dey pa raha hu our ushe se beshna ka aashafal peryash karta hue apne under kasmakash mahsush kar raha hu .
    esh rachna ke madhium se aadunikaran ka jo makhota utar ker hamare samaj ka saccha perhaust parshut karne ka jo peryash kiya hai who safal raha hai,eish ke leya lakhika badhi ke partr hai.

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  6. क्या आप अपने लड़के के लिए काली बहु या लड़की के लिए काला भुजंग दामाद पसंद करेंगे / करेंगी ???

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    1. Ye color ka issue hi galat he. Kisi ko pasand karne me uski khoobsoti uska gudluking hona dekha jata he. Gora ya kala nahi. Agar aesa hota to ek bhi kala hero or heroin (bipasha,kajole)nahi hota. Sare albinism person (jisme skin melenin nahi hota) demand me hote.:)

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  7. Benamiji Nishichit roop se aisa hi karenge,Rang roop ishwar kiden hai uska uphas uarna hamara kaam nahi hai hum seerat dekhte hai
    DINESH SAXENA
    30-06-2012

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