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गुरुवार, 29 जून 2017

लेख 


एक चुकती पीढ़ी 


आनेवाले 5/10 साल में एक
पिढी ये संसार छोड़कर जानेवाली है !
कटु लेकिन सच है ये......
इस पीढ़ी के लोग बिलकुल अलग ही हैं........
रात को जल्दो सोनेवाले
सुबह जल्दी जागनेवाले
भोर में घूमने निकलने वाले
आंगन और पौधों को पानी देने वाले...
देवपूजा के लिए फूल तोड़नेवाले
पूजा अर्चना करने वाले
पापभीरू ......
मंदिर जानेवाले
रास्ते में मिलनेवालों से बात करनेवाले
उनका सुख दु:ख पूछनेवाले
दोनो हाथ जोडकर प्रणाम करने वाले....
पूजा होये बगैर
अन्नग्रहण न करनेवाले...
उनका अजीब सा संसार
तीज त्यौहार, मेहमान शिष्टाचार ,
अन्न धान्य सब्जी भाजी की चिंता,
तीर्थयात्रा ,रीतीरिवाज
के इर्द गिर्द घूमने वाले !
पुराने फोन पे ही मोहित
फोन नंबर की पचास डायरी
मेंटेन करने वाले...
हमेशा रॉन्ग नम्बर लगाने्वाले....
लेकिन रॉन्ग नम्बर से भी बात कर लेने वाले !
दिनभर में तीन चार पेपर पढ़ने वाले
विको वज्रदंती
इस्तेमाल करनेवाले...
हमेशा एकादशी याद रखने वाले
भगवान् पर प्रचंड विश्वास रखनेवाले...
समाज का डर पालनेवाले..
पुरानी चप्पल खील ठोक कर चलानेवाले..
पुरानी बनियान बार बार पहनने वाले..
गर्मियों में अचार पापड़ बनाने वाले...
घर का कुटा हुआ हल्दी मसाला इस्तेमाल करनेवाले...
नज़र उतारनेवाले ...
सब्जीवाले से 2 रूपये के लिए झिक झिक करनेवाले...
साल में एकाध मूवी देखने वाले...
ये सभी लोग धीरे धीरे हमारा साथ छोड़ के जा रहे हैं ....
क्या आपके घर में भी ऐसा कोई है ?
यदि हाँ तो...
उनका ख्याल रखें ;
अन्यथा एक महत्वपूर्ण सीख उनके साथ ही चली जायेगी ।उनसे सीखें
क्या सीखें......?
वो है
“संतोषी जिंदगी’’ !

दिनेश सक्सेना 

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